श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.13

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

यस्त्वया मन्दभाग्योक्तो मदन्यो जगदीश्‍वरः।

क्‍वासौ यदि स सर्वत्र कस्मात् स्तम्भे न दृश्यते॥ १३

yastvayā mandabhāgyokto madanyo jagadīśvaraḥ|

kvāsau yadi sa sarvatra kasmāt stambhe na dṛśyate|| 13

अर्थ

अभागे! तूने मेरे सिवा जो और किसीको जगत‍्का स्वामी बतलाया है, सो देखूँ तो तेरा वह जगदीश्‍वर कहाँ है। अच्छा, क्या कहा, वह सर्वत्र है? तो इस खंभेमें क्यों नहीं दीखता?॥ १३॥

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