समस्त शक्ति और तेजके आश्रय भगवान्के सम्बन्धमें ऐसी घटना कोई आश्चर्यजनक नहीं है; क्योंकि सृष्टिके प्रारम्भमें उन्होंने अपने तेजसे प्रलयके निमित्तभूत तमोगुणरूपी घोर अन्धकारको भी पी लिया था। तदनन्तर वह दैत्य बड़े क्रोधसे लपका और अपनी गदाको बड़े जोरसे घुमाकर उसने नृसिंहभगवान्पर प्रहार किया॥ २५॥✎ 608609610611612
न तद् विचित्रं खलु सत्त्वधामनि
स्वतेजसा यो नु पुरापिबत् तमः।
ततोऽभिपद्याभ्यहनन्महासुरो
रुषा नृसिंहं गदयोरुवेगया॥ २५
समस्त शक्ति और तेजके आश्रय भगवान्के सम्बन्धमें ऐसी घटना कोई आश्चर्यजनक नहीं है; क्योंकि सृष्टिके प्रारम्भमें उन्होंने अपने तेजसे प्रलयके निमित्तभूत तमोगुणरूपी घोर अन्धकारको भी पी लिया था। तदनन्तर वह दैत्य बड़े क्रोधसे लपका और अपनी गदाको बड़े जोरसे घुमाकर उसने नृसिंहभगवान्पर प्रहार किया॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.8.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 851) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/8/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)