tatsutaṃ pāhyupasṛtaṃ bhaktaṃ te bhaktavatsala|| 41
अर्थ
श्रीरुद्रने कहा—आपके क्रोध करनेका समय तो कल्पके अन्तमें होता है। यदि इस तुच्छ दैत्यको मारनेके लिये ही आपने क्रोध किया है तो वह भी मारा जा चुका। उसका पुत्र आपकी शरणमें आया है। भक्तवत्सल प्रभो! आप अपने इस भक्तकी रक्षा कीजिये॥ ४१॥
कोपकालो युगान्तस्ते हतोऽयमसुरोऽल्पकः।
तत्सुतं पाह्युपसृतं भक्तं ते भक्तवत्सल॥ ४१
श्रीरुद्रने कहा—आपके क्रोध करनेका समय तो कल्पके अन्तमें होता है। यदि इस तुच्छ दैत्यको मारनेके लिये ही आपने क्रोध किया है तो वह भी मारा जा चुका। उसका पुत्र आपकी शरणमें आया है। भक्तवत्सल प्रभो! आप अपने इस भक्तकी रक्षा कीजिये॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.8.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 853) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/8/41/