श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.53

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

किम्पुरुषा ऊचुः

वयं किम्पुरुषास्त्वं तु महापुरुष ईश्‍वरः।

अयं कुपुरुषो नष्टो धिक्कृतः साधुभिर्यदा३॥ ५३

vayaṃ kimpuruṣāstvaṃ tu mahāpuruṣa īśvaraḥ|

ayaṃ kupuruṣo naṣṭo dhikkṛtaḥ sādhubhiryadā|| 53

अर्थ

किम्पुरुषोंने कहा—हमलोग अत्यन्त तुच्छ किम्पुरुष हैं और आप सर्वशक्तिमान् महापुरुष हैं। जब सत्पुरुषोंने इसका तिरस्कार किया—इसे धिक्कारा, तभी आज आपने इस कुपुरुष—असुराधमको नष्ट कर दिया॥ ५३॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—भिः सदा।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 855)

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