किन्नरोंने कहा—हम किन्नरगण आपके सेवक हैं। यह दैत्य हमसे बेगारमें ही काम लेता था। भगवन्! आपने कृपा करके आज इस पापीको नष्ट कर दिया। प्रभो! आप इसी प्रकार हमारा अभ्युदय करते रहें॥ ५५॥
वयमीश किन्नरगणास्तवानुगा
दितिजेन विष्टिममुनानु कारिताः।
भवता हरे स वृजिनोऽवसादितो
नरसिंह नाथ विभवाय नो भव॥ ५५
किन्नरोंने कहा—हम किन्नरगण आपके सेवक हैं। यह दैत्य हमसे बेगारमें ही काम लेता था। भगवन्! आपने कृपा करके आज इस पापीको नष्ट कर दिया। प्रभो! आप इसी प्रकार हमारा अभ्युदय करते रहें॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.8.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 856) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/8/55/