श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.2

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

यत्र३ यत्र हरेर्जन्म कर्माणि च महीयसः।

गृणन्ति कवयो ब्रह्मंस्तानि नो वद शृण्वताम्॥ २

yatra yatra harerjanma karmāṇi ca mahīyasaḥ|

gṛṇanti kavayo brahmaṃstāni no vada śṛṇvatām|| 2

अर्थ

ब्रह्मन्! ज्ञानी महात्मा जिस-जिस मन्वन्तरमें महामहिम भगवान्‌के जिन-जिन अवतारों और लीलाओंका वर्णन करते हैं, उन्हें आप अवश्य सुनाइये। हम बड़ी श्रद्धासे उनका श्रवण करना चाहते हैं॥ २॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—मन्वन्तरे हरे०।

    (मुद्रित पृष्ठ 905)

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