श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.3

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

सपत्नानां परामृद्धिं दृष्ट्वा ते दितिनन्दनाः।

अमृष्यमाणा उत्पेतुर्देवान्प्रत्युद्यतायुधाः॥ ३

sapatnānāṃ parāmṛddhiṃ dṛṣṭvā te ditinandanāḥ|

amṛṣyamāṇā utpeturdevānpratyudyatāyudhāḥ|| 3

अर्थ

जब दैत्योंने देखा कि हमारे शत्रुओंको तो बड़ी सफलता मिली तब वे उनकी बढ़ती सह न सके। उन्होंने तुरंत अपने हथियार उठाये और देवताओंपर धावा बोल दिया॥ ३॥✎ 723 724

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #723 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #724 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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