जब दैत्योंने देखा कि हमारे शत्रुओंको तो बड़ी सफलता मिली तब वे उनकी बढ़ती सह न सके। उन्होंने तुरंत अपने हथियार उठाये और देवताओंपर धावा बोल दिया॥ ३॥✎ 723724
सपत्नानां परामृद्धिं दृष्ट्वा ते दितिनन्दनाः।
अमृष्यमाणा उत्पेतुर्देवान्प्रत्युद्यतायुधाः॥ ३
जब दैत्योंने देखा कि हमारे शत्रुओंको तो बड़ी सफलता मिली तब वे उनकी बढ़ती सह न सके। उन्होंने तुरंत अपने हथियार उठाये और देवताओंपर धावा बोल दिया॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 951) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)