श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.30

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

अपराजितेन नमुचिरश्विनौ वृषपर्वणा।

सूर्यो बलिसुतैर्देवो बाणज्येष्ठैः शतेन च॥ ३०

aparājitena namuciraśvinau vṛṣaparvaṇā|

sūryo balisutairdevo bāṇajyeṣṭhaiḥ śatena ca|| 30

अर्थ

नमुचि अपराजितसे, अश्विनीकुमार वृषपर्वासे तथा सूर्यदेव बलिके बाण आदि सौ पुत्रोंसे युद्ध करने लगे॥ ३०॥✎ 1987

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1987 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): महोदवजीकी → महादेवजीकी

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