श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.9

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

उष्ट्रैः केचिदिभैः केचिदपरे युयुधुः खरैः।

केचिद् गौरमृगैर्ऋक्षैर्द्वीपिभिर्हरिभिर्भटाः॥ ९ ✎ 1111 1112

uṣṭraiḥ kecidibhaiḥ kecidapare yuyudhuḥ kharaiḥ|

kecid gauramṛgair:ṛkṣairdvīpibhirharibhirbhaṭāḥ|| 9

अर्थ

उनमेंसे कोई-कोई वीर ऊँटोंपर, हाथियोंपर और गधोंपर चढ़कर लड़ रहे थे तो कोई-कोई गौरमृग, भालू, बाघ और सिंहोंपर॥ ९॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1111 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): गौरमृगैऋर्क्षैर्द्वीपिभिर्हरिभिर्भटा:॥ → गौरमृगैऋर्ऋक्षैर्द्वीपिभिर्हरिभिर्भटाः॥
  • #1112 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): गौरमृगैऋर्ऋक्षैर्द्वीपिभिर्हरिभिर्भटा:॥ → गौरमृगैर्ऋक्षैर्द्वीपिभिर्हरिभिर्भटाः॥

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