॥ श्रीहरिः ॥
जम्भं श्रुत्वा हतं तस्य ज्ञातयो नारदादृषेः।
नमु३चिश्च बलः पाकस्तत्रापेतु४स्त्वरान्विताः॥ १९
jambhaṃ śrutvā hataṃ tasya jñātayo nāradādṛṣeḥ|
namuciśca balaḥ pākastatrāpetustvarānvitāḥ|| 19
अर्थ
देवर्षि नारदसे जम्भासुरकी मृत्युका समाचार जानकर उसके भाई-बन्धु नमुचि, बल और पाक झटपट रणभूमिमें आ पहुँचे॥ १९॥✎ 1978
जम्भं श्रुत्वा हतं तस्य ज्ञातयो नारदादृषेः।
नमुचिश्च बलः पाकस्तत्रापेतुस्त्वरान्विताः॥ १९
देवर्षि नारदसे जम्भासुरकी मृत्युका समाचार जानकर उसके भाई-बन्धु नमुचि, बल और पाक झटपट रणभूमिमें आ पहुँचे॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 959) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/11/19/टिप्पणियाँ
- ३
प्रा० पा०—मुचिः सबलः।
(मुद्रित पृष्ठ 959) - ४
प्रा० पा०—पेतुश्च रोषिताः।
(मुद्रित पृष्ठ 959)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1978 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): अपने → अपनी