श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.28

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

स तेनैवाष्टधारेण शिरसी बलपाकयोः।

ज्ञातीनां पश्यतां राजञ्जहार जनयन्भयम्॥ २८

sa tenaivāṣṭadhāreṇa śirasī balapākayoḥ|

jñātīnāṃ paśyatāṃ rājañjahāra janayanbhayam|| 28

अर्थ

परीक्षित्! उस आठ धारवाले पैने वज्रसे उन दैत्योंके भाई-बन्धुओंको भी भयभीत करते हुए उन्होंने बल और पाकके सिर काट लिये॥ २८॥

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