॥ श्रीहरिः ॥
गन्धर्वमुख्यौ जगतुर्विश्वावसुपरावसू।
देवदुन्दुभयो नेदुर्नर्तक्यो ननृतुर्मुदा॥ ४१
gandharvamukhyau jagaturviśvāvasuparāvasū|
devadundubhayo nedurnartakyo nanṛturmudā|| 41
अर्थ
गन्धर्वशिरोमणि विश्वावसु तथा परावसु गान करने लगे, देवताओंकी दुन्दुभियाँ बजने लगीं और नर्तकियाँ आनन्दसे नाचने लगीं॥ ४१॥
गन्धर्वमुख्यौ जगतुर्विश्वावसुपरावसू।
देवदुन्दुभयो नेदुर्नर्तक्यो ननृतुर्मुदा॥ ४१
गन्धर्वशिरोमणि विश्वावसु तथा परावसु गान करने लगे, देवताओंकी दुन्दुभियाँ बजने लगीं और नर्तकियाँ आनन्दसे नाचने लगीं॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 962) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/11/41/