श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.9

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

न वयं मन्यमानानामात्मानं तत्र साधनम्।

गिरो वः साधुशोच्यानां गृह्णीमो मर्मताडनाः॥ ९

na vayaṃ manyamānānāmātmānaṃ tatra sādhanam|

giro vaḥ sādhuśocyānāṃ gṛhṇīmo marmatāḍanāḥ|| 9

अर्थ

तुम लोग अपनेको जय-पराजय आदिका कारण—कर्ता मानते हो, इसलिये महात्माओंकी दृष्टिसे तुम शोचनीय हो। हम तुम्हारे मर्मस्पर्शी वचनको स्वीकार ही नहीं करते, फिर हमें दुःख क्यों होने लगा?॥ ९॥

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