॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.11.9
न वयं मन्यमानानामात्मानं तत्र साधनम्।
गिरो वः साधुशोच्यानां गृह्णीमो मर्मताडनाः॥ ९
na vayaṃ manyamānānāmātmānaṃ tatra sādhanam|
giro vaḥ sādhuśocyānāṃ gṛhṇīmo marmatāḍanāḥ|| 9
अर्थ
तुम लोग अपनेको जय-पराजय आदिका कारण—कर्ता मानते हो, इसलिये महात्माओंकी दृष्टिसे तुम शोचनीय हो। हम तुम्हारे मर्मस्पर्शी वचनको स्वीकार ही नहीं करते, फिर हमें दुःख क्यों होने लगा?॥ ९॥