श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.1

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

अथ द्वादशोऽध्यायः

मोहिनीरूपको देखकर महादेवजीका मोहित होना

श्रीबादरायणिरुवाच

वृषध्वजो निशम्येदं योषिद्रूपेण दानवान्।

मोहयित्वा सुरगणान्हरिः सोममपाययत्॥ १

vṛṣadhvajo niśamyedaṃ yoṣidrūpeṇa dānavān|

mohayitvā suragaṇānhariḥ somamapāyayat|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब भगवान् शंकरने यह सुना कि श्रीहरिने स्त्रीका रूप धारण करके असुरोंको मोहित कर लिया और देवताओंको अमृत पिला दिया, तब वे सतीदेवीके साथ बैलपर सवार हो समस्त भूतगणोंको लेकर वहाँ गये, जहाँ भगवान् मधुसूदन निवास करते हैं॥ १-२॥

यह अर्थ श्लोक 1–2 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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