॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.12.11
स त्वं समीहितमदः स्थितिजन्मनाशं
भूतेहितं च जगतो भवबन्धमोक्षौ।
वायुर्यथा विशति खं च चराचराख्यं
सर्वं तदात्मकतयावगमोऽवरुन्त्से॥ ११
sa tvaṃ samīhitamadaḥ sthitijanmanāśaṃ
bhūtehitaṃ ca jagato bhavabandhamokṣau|
vāyuryathā viśati khaṃ ca carācarākhyaṃ
sarvaṃ tadātmakatayāvagamo'varuntse|| 11
अर्थ
प्रभो! आप सर्वात्मक एवं ज्ञानस्वरूप हैं। इसीलिये वायुके समान आकाशमें अदृश्य रहकर भी आप सम्पूर्ण चराचर जगत्में सदा-सर्वदा विद्यमान रहते हैं तथा इसकी चेष्टा, स्थिति, जन्म, नाश, प्राणियोंके कर्म एवं संसारके बन्धन, मोक्ष—सभीको जानते हैं॥ ११॥