bhavānyā api paśyantyā gatahrīstatpadaṃ yayau|| 25
अर्थ
उसने शंकरजीका विवेक छीन लिया। वे उसके हाव-भावोंसे कामातुर हो गये और भवानीके सामने ही लज्जा छोड़कर उसकी ओर चल पड़े॥ २५॥
तयापहृतविज्ञानस्तत्कृतस्मरविह्वलः ।
भवान्या अपि पश्यन्त्या गतह्रीस्तत्पदं ययौ॥ २५
उसने शंकरजीका विवेक छीन लिया। वे उसके हाव-भावोंसे कामातुर हो गये और भवानीके सामने ही लज्जा छोड़कर उसकी ओर चल पड़े॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 966) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/12/25/