श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.32

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तस्यानुधावतो रेतश्‍चस्कन्दामोघरेतसः।

शुष्मिणो यूथपस्येव वासितामनु धावतः॥ ३२

tasyānudhāvato retaścaskandāmogharetasaḥ|

śuṣmiṇo yūthapasyeva vāsitāmanu dhāvataḥ|| 32

अर्थ

कामुक हथिनीके पीछे दौड़नेवाले मदोन्मत्त हाथीके समान वे मोहिनीके पीछे-पीछे दौड़ रहे थे। यद्यपि भगवान् शंकरका वीर्य अमोघ है, फिर भी मोहिनीकी मायासे वह स्खलित हो गया॥ ३२॥✎ 734 735 736 737 738

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)
  • #734 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #735 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #736 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #737 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #738 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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