श्रीभगवान्ने कहा—देवशिरोमणे! मेरी स्त्रीरूपिणी मायासे विमोहित होकर भी आप स्वयं ही अपनी निष्ठामें स्थित हो गये। यह बड़े ही आनन्दकी बात है॥ ३८॥✎ 739
दिष्ट्या त्वं विबुधश्रेष्ठ स्वां निष्ठामात्मना स्थितः।
यन्मे स्त्रीरूपया स्वैरं मोहितोऽप्यङ्ग मायया॥ ३८
श्रीभगवान्ने कहा—देवशिरोमणे! मेरी स्त्रीरूपिणी मायासे विमोहित होकर भी आप स्वयं ही अपनी निष्ठामें स्थित हो गये। यह बड़े ही आनन्दकी बात है॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 967) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/12/38/
टिप्पणियाँ
३
प्रा० पा०—मात्मनि।
(मुद्रित पृष्ठ 967)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#739 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने