॥ श्रीहरिः ॥
विहङ्गमाः कामगमा निर्वाणरुचयः सुराः।
इन्द्रश्च वैधृतस्तेषामृषयश्चारुणादयः॥ २५
vihaṅgamāḥ kāmagamā nirvāṇarucayaḥ surāḥ|
indraśca vaidhṛtasteṣāmṛṣayaścāruṇādayaḥ|| 25
अर्थ
विहंगम, कामगम, निर्वाणरुचि आदि देवताओंके गण होंगे। अरुणादि सप्तर्षि होंगे और वैधृत नामके इन्द्र होंगे॥ २५॥
विहङ्गमाः कामगमा निर्वाणरुचयः सुराः।
इन्द्रश्च वैधृतस्तेषामृषयश्चारुणादयः॥ २५
विहंगम, कामगम, निर्वाणरुचि आदि देवताओंके गण होंगे। अरुणादि सप्तर्षि होंगे और वैधृत नामके इन्द्र होंगे॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 971) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/13/25/