इन्द्र भगवान्की दी हुई त्रिलोकीकी अतुल सम्पत्तिका उपभोग और प्रजाका पालन करते हैं। संसारमें यथेष्ट वर्षा करनेका अधिकार भी उन्हींको है॥ ७॥✎ 744745746
इन्द्रो भगवता दत्तां त्रैलोक्यश्रियमूर्जिताम्।
भुञ्जानः पाति लोकांस्त्रीन् कामं लोके प्रवर्षति॥ ७
इन्द्र भगवान्की दी हुई त्रिलोकीकी अतुल सम्पत्तिका उपभोग और प्रजाका पालन करते हैं। संसारमें यथेष्ट वर्षा करनेका अधिकार भी उन्हींको है॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.14.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 973) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/14/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)