॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.15.22
यां न व्रजन्त्यधर्मिष्ठाः खला भूतद्रुहः शठाः।
मानिनः कामिनो लुब्धा एभिर्हीना व्रजन्ति यत्॥ २२
yāṃ na vrajantyadharmiṣṭhāḥ khalā bhūtadruhaḥ śaṭhāḥ|
māninaḥ kāmino lubdhā ebhirhīnā vrajanti yat|| 22
अर्थ
उस पुरीमें अधर्मी, दुष्ट, जीवद्रोही, ठग, मानी, कामी और लोभी नहीं जा सकते। जो इन दोषोंसे रहित हैं, वे ही वहाँ जाते हैं॥ २२॥✎ 1971