श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.33

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

देवेष्वथ निलीनेषु बलिर्वैरोचनः पुरीम्।

देवधानीमधिष्ठाय वशं निन्ये जगत्त्रयम्॥ ३३

deveṣvatha nilīneṣu balirvairocanaḥ purīm|

devadhānīmadhiṣṭhāya vaśaṃ ninye jagattrayam|| 33

अर्थ

देवताओंके छिप जानेपर विरोचननन्दन बलिने अमरावतीपुरीपर अपना अधिकार कर लिया और फिर तीनों लोकोंको जीत लिया॥ ३३॥✎ 747

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #747 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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