श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.35

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

ततस्तदनुभावेन भुवनत्रयविश्रुताम्।

कीर्तिं दिक्षु वितन्वानः स रेज उडुराडिव॥ ३५

tatastadanubhāvena bhuvanatrayaviśrutām|

kīrtiṃ dikṣu vitanvānaḥ sa reja uḍurāḍiva|| 35

अर्थ

उन यज्ञोंके प्रभावसे बलिकी कीर्तिकौमुदी तीनों लोकोंसे बाहर भी दसों दिशाओंमें फैल गयी और वे नक्षत्रोंके राजा चन्द्रमाके समान शोभायमान हुए॥ ३५॥

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