श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.49

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

वर्जयेदसदालापं भोगानुच्चावचांस्तथा।

अहिंस्रः सर्वभूतानां वासुदेवपरायणः॥ ४९

varjayedasadālāpaṃ bhogānuccāvacāṃstathā|

ahiṃsraḥ sarvabhūtānāṃ vāsudevaparāyaṇaḥ|| 49

अर्थ

झूठ न बोले। पापियोंसे बात न करे। पापकी बात न करे। छोटे-बड़े सब प्रकारके भोगोंका त्याग कर दे। किसी भी प्राणीको किसी प्रकारसे कष्ट न पहुँचावे। भगवान्‌की आराधनामें लगा ही रहे॥ ४९॥✎ 760

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #760 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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