झूठ न बोले। पापियोंसे बात न करे। पापकी बात न करे। छोटे-बड़े सब प्रकारके भोगोंका त्याग कर दे। किसी भी प्राणीको किसी प्रकारसे कष्ट न पहुँचावे। भगवान्की आराधनामें लगा ही रहे॥ ४९॥✎ 760
वर्जयेदसदालापं भोगानुच्चावचांस्तथा।
अहिंस्रः सर्वभूतानां वासुदेवपरायणः॥ ४९
झूठ न बोले। पापियोंसे बात न करे। पापकी बात न करे। छोटे-बड़े सब प्रकारके भोगोंका त्याग कर दे। किसी भी प्राणीको किसी प्रकारसे कष्ट न पहुँचावे। भगवान्की आराधनामें लगा ही रहे॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 983) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/16/49/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)