उस दिन धनका संकोच छोड़कर भगवान्की बहुत बड़ी पूजा करनी चाहिये और दूधमें चरु (खीर) पकाकर विष्णुभगवान्को अर्पित करना चाहिये॥ ५१॥✎ 761762
पूजां च महतीं कुर्याद् वित्तशाठ्यविवर्जितः।
चरुं निरूप्य पयसि शिपिविष्टाय विष्णवे॥ ५१
उस दिन धनका संकोच छोड़कर भगवान्की बहुत बड़ी पूजा करनी चाहिये और दूधमें चरु (खीर) पकाकर विष्णुभगवान्को अर्पित करना चाहिये॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 983) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/16/51/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#761 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् को → विष्णुभगवान्को