श्रीभगवान्ने कहा—देवताओंकी जननी अदिति! तुम्हारी चिरकालीन अभिलाषाको मैं जानता हूँ। शत्रुओंने तुम्हारे पुत्रोंकी सम्पत्ति छीन ली है, उन्हें उनके लोक (स्वर्ग)-से खदेड़ दिया है॥ १२॥✎ 775776
देवमातर्भवत्या मे विज्ञातं चिरकाङ्क्षितम्।
यत् सपत्नैर्हृतश्रीणां च्यावितानां स्वधामतः॥ १२
श्रीभगवान्ने कहा—देवताओंकी जननी अदिति! तुम्हारी चिरकालीन अभिलाषाको मैं जानता हूँ। शत्रुओंने तुम्हारे पुत्रोंकी सम्पत्ति छीन ली है, उन्हें उनके लोक (स्वर्ग)-से खदेड़ दिया है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.17.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 986) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/17/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)