श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.17.4

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

तस्याः प्रादुरभूत्तात भगवानादिपूरुषः।

पीतवासाश्‍चतुर्बाहुः शङ्खचक्रगदाधरः॥ ४

tasyāḥ prādurabhūttāta bhagavānādipūruṣaḥ|

pītavāsāścaturbāhuḥ śaṅkhacakragadādharaḥ|| 4

अर्थ

तब पुरुषोत्तमभगवान् उसके सामने प्रकट हुए। परीक्षित्! वे पीताम्बर धारण किये हुए थे, चार भुजाएँ थीं और शंख, चक्र, गदा लिये हुए थे॥ ४॥✎ 769 770 771 772

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
  • #769 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #770 शब्दोंके बीचका स्थान: यज्ञेश्‍वर-भगवान् को → यज्ञेश्‍वर-भगवान्‌को
  • #771 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #772 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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