adya sviṣṭaḥ kraturayaṃ yad bhavānāgato gṛhān|| 30
अर्थ
आज आप मेरे घर पधारे, इससे मेरे पितर तृप्त हो गये। आज मेरा वंश पवित्र हो गया। आज मेरा यह यज्ञ सफल हो गया॥ ३०॥
अद्य नः पितरस्तृप्ता अद्य नः पावितं कुलम्।
अद्य स्विष्टः क्रतुरयं यद् भवानागतो गृहान्॥ ३०
आज आप मेरे घर पधारे, इससे मेरे पितर तृप्त हो गये। आज मेरा वंश पवित्र हो गया। आज मेरा यह यज्ञ सफल हो गया॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.18.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 992) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/18/30/