॥ श्रीहरिः ॥
सप्तद्वीपाधिपतयो नृपा वैन्यगयादयः।
अर्थैः कामैर्गता नान्तं तृष्णाया इति नः श्रुतम्॥ २३
saptadvīpādhipatayo nṛpā vainyagayādayaḥ|
arthaiḥ kāmairgatā nāntaṃ tṛṣṇāyā iti naḥ śrutam|| 23
अर्थ
मैंने सुना है कि पृथु, गय आदि नरेश सातों द्वीपोंके अधिपति थे; परन्तु उतने धन और भोगकी सामग्रियोंके मिलनेपर भी वे तृष्णाका पार न पा सके॥ २३॥
सप्तद्वीपाधिपतयो नृपा वैन्यगयादयः।
अर्थैः कामैर्गता नान्तं तृष्णाया इति नः श्रुतम्॥ २३
मैंने सुना है कि पृथु, गय आदि नरेश सातों द्वीपोंके अधिपति थे; परन्तु उतने धन और भोगकी सामग्रियोंके मिलनेपर भी वे तृष्णाका पार न पा सके॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.19.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 995) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/19/23/