भगवान् वामनजीका विराट्रूप होकर दो ही पगसे पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेना✎ 1369
श्रीशुक उवाच
बलिरेवं गृहपतिः कुलाचार्येण भाषितः।
तूष्णीं भूत्वा क्षणं राजन्नुवाचावहितो गुरुम्॥ १
balirevaṃ gṛhapatiḥ kulācāryeṇa bhāṣitaḥ|
tūṣṇīṃ bhūtvā kṣaṇaṃ rājannuvācāvahito gurum|| 1
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—राजन्! जब कुलगुरु शुक्राचार्यने इस प्रकार कहा, तब आदर्श गृहस्थ राजा बलिने एक क्षण चुप रहकर बड़ी विनय और सावधानीसे शुक्राचार्यजीके प्रति यों कहा॥ १॥
बलिरेवं गृहपतिः कुलाचार्येण भाषितः।
तूष्णीं भूत्वा क्षणं राजन्नुवाचावहितो गुरुम्॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—राजन्! जब कुलगुरु शुक्राचार्यने इस प्रकार कहा, तब आदर्श गृहस्थ राजा बलिने एक क्षण चुप रहकर बड़ी विनय और सावधानीसे शुक्राचार्यजीके प्रति यों कहा॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.20.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 998) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/20/1/