उसी समय राजा बलिकी पत्नी विन्ध्यावली, जो मोतियोंके गहनोंसे सुसज्जित थी, वहाँ आयी। उसने अपने हाथों वामनभगवान्के चरण पखारनेके लिये जलसे भरा सोनेका कलश लाकर दिया॥ १७॥
विन्ध्यावलिस्तदाऽऽगत्य पत्नी जालकमालिनी।
आनिन्ये कलशं हैममवनेजन्यपां भृतम्॥ १७
उसी समय राजा बलिकी पत्नी विन्ध्यावली, जो मोतियोंके गहनोंसे सुसज्जित थी, वहाँ आयी। उसने अपने हाथों वामनभगवान्के चरण पखारनेके लिये जलसे भरा सोनेका कलश लाकर दिया॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.20.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1000) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/20/17/