॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.20.25
हृद्यङ्ग धर्मं स्तनयोर्मुरारे-
र्ऋतं च सत्यं च मनस्यथेन्दुम्।✎ 1120 1121
श्रियं च वक्षस्यरविन्दहस्तां
कण्ठे च सामानि समस्तरेफान्॥ २५
hṛdyaṅga dharmaṃ stanayormurāre-
r:ṛtaṃ ca satyaṃ ca manasyathendum|
śriyaṃ ca vakṣasyaravindahastāṃ
kaṇṭhe ca sāmāni samastarephān|| 25
अर्थ
उन लोगोंको भगवान्के हृदयमें धर्म, स्तनोंमें ऋत (मधुर) और सत्य वचन, मनमें चन्द्रमा, वक्षः-स्थलपर हाथोंमें कमल लिये लक्ष्मीजी, कण्ठमें सामवेद और सम्पूर्ण शब्दसमूह उन्हें दीखे॥ २५॥