तस्य त्यागे निमित्तं किं विप्रस्तुष्येन्न तेन चेत्॥ ६
yad yaddhāsyati loke'sminsaṃparetaṃ dhanādikam|
tasya tyāge nimittaṃ kiṃ viprastuṣyenna tena cet|| 6
अर्थ
इस संसारमें मर जानेके बाद धन आदि जो-जो वस्तुएँ साथ छोड़ देती हैं, यदि उनके द्वारा दान आदिसे ब्राह्मणोंको भी सन्तुष्ट न किया जा सका, तो उनके त्यागका लाभ ही क्या रहा?॥ ६॥
यद् यद्धास्यति लोकेऽस्मिन्संपरेतं धनादिकम्।
तस्य त्यागे निमित्तं किं विप्रस्तुष्येन्न तेन चेत्॥ ६
इस संसारमें मर जानेके बाद धन आदि जो-जो वस्तुएँ साथ छोड़ देती हैं, यदि उनके द्वारा दान आदिसे ब्राह्मणोंको भी सन्तुष्ट न किया जा सका, तो उनके त्यागका लाभ ही क्या रहा?॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.20.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 998) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/20/6/