श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.21.1

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

अथैकविंशोऽध्यायः

बलिका बाँधा जाना

श्रीशुक उवाच

सत्यं समीक्ष्याब्जभवो नखेन्दुभि-

र्हतस्वधामद्युतिरावृतोऽभ्यगात् ।

मरीचिमिश्रा ऋषयो बृहद्व्रताः

सनन्दनाद्या नरदेव योगिनः॥ १

satyaṃ samīkṣyābjabhavo nakhendubhi-

rhatasvadhāmadyutirāvṛto'bhyagāt |

marīcimiśrā ṛṣayo bṛhadvratāḥ

sanandanādyā naradeva yoginaḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान्‌का चरणकमल सत्यलोकमें पहुँच गया। उसके नखचन्द्रकी छटासे सत्यलोककी आभा फीकी पड़ गयी। स्वयं ब्रह्मा भी उसके प्रकाशमें डूब-से गये। उन्होंने मरीचि आदि ऋषियों, सनन्दन आदि नैष्ठिक ब्रह्मचारियों एवं बड़े-बड़े योगियोंके साथ भगवान्‌के चरणकमलकी अगवानी की॥ १॥

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