जब प्रह्लादने देखा कि मेरे वंशधर पौत्र राजा बलि बन्धनसे छूट गये और उन्हें भगवान्का कृपा-प्रसाद प्राप्त हो गया तो वे भक्ति-भावसे भर गये। उस समय उन्होंने भगवान्की इस प्रकार स्तुति की॥ ५॥✎ 819820
लब्धप्रसादं निर्मुक्तं पौत्रं वंशधरं बलिम्।
निशाम्य भक्तिप्रवणः प्रह्राद इदमब्रवीत्॥ ५
जब प्रह्लादने देखा कि मेरे वंशधर पौत्र राजा बलि बन्धनसे छूट गये और उन्हें भगवान्का कृपा-प्रसाद प्राप्त हो गया तो वे भक्ति-भावसे भर गये। उस समय उन्होंने भगवान्की इस प्रकार स्तुति की॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.23.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1011) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/23/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)