श्रीभगवान्ने कहा—बेटा प्रह्लाद! तुम्हारा कल्याण हो। अब तुम भी सुतल लोकमें जाओ। वहाँ अपने पौत्र बलिके साथ आनन्दपूर्वक रहो और जाति-बन्धुओंको सुखी करो॥ ९॥✎ 821
वत्स प्रह्राद भद्रं ते प्रयाहि सुतलालयम्।
मोदमानः स्वपौत्रेण ज्ञातीनां सुखमावह॥ ९
श्रीभगवान्ने कहा—बेटा प्रह्लाद! तुम्हारा कल्याण हो। अब तुम भी सुतल लोकमें जाओ। वहाँ अपने पौत्र बलिके साथ आनन्दपूर्वक रहो और जाति-बन्धुओंको सुखी करो॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.23.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1012) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/23/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#821 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने