श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.19

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

स एनां तत आदाय न्यधादौदञ्चनोदके।

तत्र क्षिप्ता मुहूर्तेन हस्तत्रयमवर्धत॥ १९

sa enāṃ tata ādāya nyadhādaudañcanodake|

tatra kṣiptā muhūrtena hastatrayamavardhata|| 19

अर्थ

राजा सत्यव्रतने मछलीको कमण्डलुसे निकालकर एक बहुत बड़े पानीके मटकेमें रख दिया। परन्तु वहाँ डालनेपर वह मछली दो ही घड़ीमें तीन हाथ बढ़ गयी॥ १९॥✎ 833 2038

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #833 शब्दोंके बीचका स्थान: मत्स्यभगवान् ने → मत्स्यभगवान्‌ने
  • #2038 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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