राजा सत्यव्रतने मछलीको कमण्डलुसे निकालकर एक बहुत बड़े पानीके मटकेमें रख दिया। परन्तु वहाँ डालनेपर वह मछली दो ही घड़ीमें तीन हाथ बढ़ गयी॥ १९॥✎ 8332038
स एनां तत आदाय न्यधादौदञ्चनोदके।
तत्र क्षिप्ता मुहूर्तेन हस्तत्रयमवर्धत॥ १९
राजा सत्यव्रतने मछलीको कमण्डलुसे निकालकर एक बहुत बड़े पानीके मटकेमें रख दिया। परन्तु वहाँ डालनेपर वह मछली दो ही घड़ीमें तीन हाथ बढ़ गयी॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1016) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#833 शब्दोंके बीचका स्थान: मत्स्यभगवान् ने → मत्स्यभगवान्ने