आपने एक ही दिनमें चार सौ कोसके विस्तारका सरोवर घेर लिया। आजतक ऐसी शक्ति रखनेवाला जलचर जीव तो न मैंने कभी देखा था और न सुना ही था॥ २६॥✎ 834
नैवंवीर्यो जलचरो दृष्टोऽस्माभिः श्रुतोऽपि च।
यो भवान् योजनशतमह्नाभिव्यानशे सरः॥ २६
आपने एक ही दिनमें चार सौ कोसके विस्तारका सरोवर घेर लिया। आजतक ऐसी शक्ति रखनेवाला जलचर जीव तो न मैंने कभी देखा था और न सुना ही था॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1017) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#834 शब्दोंके बीचका स्थान: मत्स्यभगवान् की → मत्स्यभगवान्की