श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.3.2

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

गजेन्द्र उवाच

ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम्।

पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि॥ २

oṃ namo bhagavate tasmai yata etaccidātmakam|

puruṣāyādibījāya pareśāyābhidhīmahi|| 2

अर्थ

गजेन्द्रने कहा—जो जगत‍्के मूल कारण हैं और सबके हृदयमें पुरुषके रूपमें विराजमान हैं एवं समस्त जगत‍्के एकमात्र स्वामी हैं, जिनके कारण इस संसारमें चेतनताका विस्तार होता है—उन भगवान्‌को मैं नमस्कार करता हूँ, प्रेमसे उनका ध्यान करता हूँ॥ २॥✎ 661 662

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #661 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #662 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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