इसीसे कल्याणकामी द्विजगण दुःस्वप्न आदिकी शान्तिके लिये प्रातःकाल जगते ही पवित्र होकर इसका पाठ करते हैं॥ १५॥✎ 674
यथानुकीर्तयन्त्येतच्छ्रेयस्कामा द्विजातयः।
शुचयः प्रातरुत्थाय दुःस्वप्नाद्युपशान्तये॥ १५
इसीसे कल्याणकामी द्विजगण दुःस्वप्न आदिकी शान्तिके लिये प्रातःकाल जगते ही पवित्र होकर इसका पाठ करते हैं॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.4.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 921) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/4/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#674 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीहरिभगवान् ने → श्रीहरिभगवान्ने