प्रपन्नानां दिदृक्षूणां सस्मितं ते मुखाम्बुजम्॥ ४५
sa tvaṃ no darśayātmānamasmatkaraṇagocaram|
prapannānāṃ didṛkṣūṇāṃ sasmitaṃ te mukhāmbujam|| 45
अर्थ
प्रभो! हम आपके शरणागत हैं और चाहते हैं कि मन्द-मन्द मुसकानसे युक्त आपका मुखकमल अपने इन्हीं नेत्रोंसे देखें। आप कृपा करके हमें उसका दर्शन कराइये॥ ४५॥
स त्वं नो दर्शयात्मानमस्मत्करणगोचरम्।
प्रपन्नानां दिदृक्षूणां सस्मितं ते मुखाम्बुजम्॥ ४५
प्रभो! हम आपके शरणागत हैं और चाहते हैं कि मन्द-मन्द मुसकानसे युक्त आपका मुखकमल अपने इन्हीं नेत्रोंसे देखें। आप कृपा करके हमें उसका दर्शन कराइये॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.5.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 928) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/5/45/