श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.5.9

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तत्रापि देवः सम्भूत्यां वैराजस्याभवत् सुतः।

अजितो नाम भगवानंशेन जगतः पतिः॥ ९

tatrāpi devaḥ sambhūtyāṃ vairājasyābhavat sutaḥ|

ajito nāma bhagavānaṃśena jagataḥ patiḥ|| 9

अर्थ

जगत्पति भगवान्‌ने उस समय भी वैराजकी पत्‍नी सम्भूतिके गर्भसे अजित नामका अंशावतार ग्रहण किया था॥ ९॥✎ 679

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #679 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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