श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.6.2

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तेनैव महसा सर्वे देवाः प्रतिहतेक्षणाः।

नापश्यन्खं दिशः क्षोणिमात्मानं च कुतो विभुम्॥ २

tenaiva mahasā sarve devāḥ pratihatekṣaṇāḥ|

nāpaśyankhaṃ diśaḥ kṣoṇimātmānaṃ ca kuto vibhum|| 2

अर्थ

भगवान्‌की उस प्रभासे सभी देवताओंकी आँखें चौंधिया गयीं। वे भगवान्‌को तो क्या—आकाश, दिशाएँ, पृथ्वी और अपने शरीरको भी न देख सके॥ २॥✎ 689 690 2031

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #689 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #690 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #2031 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें