परीक्षित्! जब समुद्रमन्थन होने लगा, तब बड़े-बड़े बलवान् देवता और असुरोंके पकड़े रहनेपर भी अपने भारकी अधिकता और नीचे कोई आधार न होनेके कारण मन्दराचल समुद्रमें डूबने लगा॥ ६॥✎ 697698699700701
मथ्यमानेऽर्णवे सोऽद्रिरनाधारो ह्यपोऽविशत्।
ध्रियमाणोऽपि बलिभिर्गौरवात् पाण्डुनन्दन॥ ६
परीक्षित्! जब समुद्रमन्थन होने लगा, तब बड़े-बड़े बलवान् देवता और असुरोंके पकड़े रहनेपर भी अपने भारकी अधिकता और नीचे कोई आधार न होनेके कारण मन्दराचल समुद्रमें डूबने लगा॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.7.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 935) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/7/6/