श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.5

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

नूनं त्वं विधिना सुभ्रूः प्रेषितासि शरीरिणाम्।

सर्वेन्द्रियमनःप्रीतिं विधातुं सघृणेन किम्॥ ५

nūnaṃ tvaṃ vidhinā subhrūḥ preṣitāsi śarīriṇām|

sarvendriyamanaḥprītiṃ vidhātuṃ saghṛṇena kim|| 5

अर्थ

सुन्दरी! अवश्य ही विधाताने दया करके शरीरधारियोंकी सम्पूर्ण इन्द्रियों एवं मनको तृप्त करनेके लिये तुम्हें यहाँ भेजा है॥ ५॥✎ 716

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #716 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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