श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.9.7

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

वयं कश्यपदायादा भ्रातरः कृतपौरुषाः।

विभजस्व यथान्यायं नैव भेदो यथा भवेत्॥ ७

vayaṃ kaśyapadāyādā bhrātaraḥ kṛtapauruṣāḥ|

vibhajasva yathānyāyaṃ naiva bhedo yathā bhavet|| 7

अर्थ

हम सभी कश्यपजीके पुत्र होनेके नाते सगे भाई हैं। हमलोगोंने अमृतके लिये बड़ा पुरुषार्थ किया है। तुम न्यायके अनुसार निष्पक्षभावसे इसे बाँट दो, जिससे फिर हमलोगोंमें किसी प्रकारका झगड़ा न हो’॥ ७॥✎ 716

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #716 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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