हम सभी कश्यपजीके पुत्र होनेके नाते सगे भाई हैं। हमलोगोंने अमृतके लिये बड़ा पुरुषार्थ किया है। तुम न्यायके अनुसार निष्पक्षभावसे इसे बाँट दो, जिससे फिर हमलोगोंमें किसी प्रकारका झगड़ा न हो’॥ ७॥✎ 716
वयं कश्यपदायादा भ्रातरः कृतपौरुषाः।
विभजस्व यथान्यायं नैव भेदो यथा भवेत्॥ ७
हम सभी कश्यपजीके पुत्र होनेके नाते सगे भाई हैं। हमलोगोंने अमृतके लिये बड़ा पुरुषार्थ किया है। तुम न्यायके अनुसार निष्पक्षभावसे इसे बाँट दो, जिससे फिर हमलोगोंमें किसी प्रकारका झगड़ा न हो’॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.9.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 948) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/9/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)