उस समय अम्बिका देवी वस्त्रहीन थीं। ऋषियोंको सहसा आया देख वे अत्यन्त लज्जित हो गयीं। झटपट उन्होंने भगवान् शंकरकी गोदसे उठकर वस्त्र धारण कर लिया॥ ३०॥
तान् विलोक्याम्बिका देवी विवासा व्रीडिता भृशम्।
भर्तुरंकात् समुत्थाय नीवीमाश्वथ पर्यधात्॥ ३०
उस समय अम्बिका देवी वस्त्रहीन थीं। ऋषियोंको सहसा आया देख वे अत्यन्त लज्जित हो गयीं। झटपट उन्होंने भगवान् शंकरकी गोदसे उठकर वस्त्र धारण कर लिया॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 10) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/1/30/