श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.2

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तस्यापि भगवानेष साक्षाद् ब्रह्ममयो हरिः।

अंशांशेन चतुर्धागात् पुत्रत्वं प्रार्थितः सुरैः।

रामलक्ष्मणभरतशत्रुघ्ना इति संज्ञया॥ २

tasyāpi bhagavāneṣa sākṣād brahmamayo hariḥ|

aṃśāṃśena caturdhāgāt putratvaṃ prārthitaḥ suraiḥ|

rāmalakṣmaṇabharataśatrughnā iti saṃjñayā|| 2

अर्थ

देवताओंकी प्रार्थनासे साक्षात् परमब्रह्म परमात्मा भगवान् श्रीहरि ही अपने अंशांशसे चार रूप धारण करके राजा दशरथके पुत्र हुए। उनके नाम थे—राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न॥ २॥

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