इसके बाद भगवान् श्रीरामने अशोक-वाटिकाके आश्रममें अशोक वृक्षके नीचे बैठी हुई श्रीसीताजीको देखा। वे उन्हींके विरहकी व्याधिसे पीड़ित एवं अत्यन्त दुर्बल हो रही थीं॥ ३०॥✎ 2049
ततो ददर्श भगवानशोकवनिकाश्रमे।
क्षामां स्वविरहव्याधिं शिंशपामूलमास्थिताम्॥ ३०
इसके बाद भगवान् श्रीरामने अशोक-वाटिकाके आश्रममें अशोक वृक्षके नीचे बैठी हुई श्रीसीताजीको देखा। वे उन्हींके विरहकी व्याधिसे पीड़ित एवं अत्यन्त दुर्बल हो रही थीं॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.10.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 57) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/10/30/