अपनी प्राणप्रिया अर्धांगिनी श्रीसीताजीको अत्यन्त दीन अवस्थामें देखकर श्रीरामका हृदय प्रेम और कृपासे भर आया। इधर भगवान्का दर्शन पाकर सीताजीका हृदय प्रेम और आनन्दसे परिपूर्ण हो गया, उनका मुखकमल खिल उठा॥ ३१॥✎ 2049
रामः प्रियतमां भार्यां दीनां वीक्ष्यान्वकम्पत।
आत्मसंदर्शनाह्लादविकसन्मुखपंकजाम् ॥ ३१
अपनी प्राणप्रिया अर्धांगिनी श्रीसीताजीको अत्यन्त दीन अवस्थामें देखकर श्रीरामका हृदय प्रेम और कृपासे भर आया। इधर भगवान्का दर्शन पाकर सीताजीका हृदय प्रेम और आनन्दसे परिपूर्ण हो गया, उनका मुखकमल खिल उठा॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.10.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 57) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/10/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)